एक कहानी जो शुरू हुई है घर से - Earth Shastra Reflection

Contributor: Mohit Gupta

ये सुन्दर कविता, मोहित द्वारा रचित है - अर्थ-शास्त्र लर्निंग प्रोसेस में उभरी.   

एक कहानी जो शुरू हुई है घर से
घर जिसके कईं नाम हैं, जहाँ पाएं हमनें कईं मुकाम हैं।
किसी के लिए घर एक गाँव है, किसी के लिए वो एक मकान है।
कुछ इस धरती को अपना घर कहतें हैं और कुछ इस शरीर को अपना घर मानते हैं।
लेकिन क्या मायनें हैं इस घर के ?

क्या कोई जगह है जहाँ हमें अपने होने का एहसास हो ?
या है वो कहीं जहाँ खुद पे यकीन हो ?
लेकिन क्या खूब किसी ने कहा है,
हम सबको अपने घर की ही तलाश है।

फिर आगे बढ़ते सफर पर कहानियों का पड़ाव आया |
कैसे हम मानव जाति सिर्फ कहानियों को मानती है |
क्या है पैसा? कौन हैं मेरे अपने? कहाँ है मेरा शहर? और कौन सा मेरा देश ?
क्यों कहानियां थोपते हैं एक दूसरे पर।

कहीं शिक्षा भी एक दिखावा है ?
और असली शिक्षा सिर्फ डिग्री पाना है।
ये समाज ये लोग एक रोबोट चाहते हैं ,
तुम बदल चुके हो ऐसा ही सब मानते हैं।

अगर मेरी खुद की खोज अभी जारी है।
तो क्यों मानी जाती इसे लाचारी है ?
नहीं जीना है तुम्हारे मॉडर्न नैरेटिव के साथ,
जहाँ रिश्ते सिर्फ और सिर्फ एक ढोंग हैं।

हर किसी के लिए ज़िन्दगी एक वरदान है।
चलना, गिरना, संभालना और फिर से उठके आगे बढ़ना, जीना इसी का नाम है।


Painting by Ritika Merchant


--
Mohit is a seeker, an experimenter. He is deeply passionate about the environment and lives the value of sustainability through urban farming, composting. His attitude of celebrating his way towards deeper meanings of life - is infectious. Here is his blog: Travel Off Tradition

 Earth-Shastra Learning Process is a 4-mouth long journey to reclaim one's relationship with nature. It intertwines the personal, the collective and the systemic dimensions, learn more here.

Comments